ध्वनि तरंगे: श्रव्य, अवश्रव्य, पराश्रव्य तरंगें


विषयसूची:- ध्वनि तरंग, श्रव्य, अवश्रव्य, पराश्रव्य तरंगें, पराश्रव्य तरंगों का उपयोग, मैक संख्या, ध्वनि तरंगो का आवृति, वायु में ध्वनि की चाल पर दाब, ताप आर्द्रता और वायु का प्रभाव, विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल, ध्वनि तरंग के प्रमुख लक्षण (तीव्रता, गुणता, ध्वनि का परावर्तन, ध्वनि का अपवर्तन, अनुनाद, अनुरणन, ध्वनि का विवर्तन, ध्वनि का व्यतिकरण), डॉप्लर प्रभाव (Doppler's Effect), ध्वनि बूम.

ध्वनि तरंग किसे कहते है?: ध्वनि एक अनुदैर्ध्य तरंगे होती है , जिसकी उत्पत्ति किसी न किसी वस्तु के कम्पन करने से होती है, और जो हमारे कानों में संवेदना उत्पन्न करती है।  

ध्वनि तरंगो का आवृति परिसर (Frequency Rangle of Sound Wave)


#01. श्रव्य ध्वनि तरंगें (Audible waves): मनुष्य 20 Hz से 20,000 Hz के बीच की आवृत्ति वाली ध्वनियों को सुन सकता है। यह श्रव्य ध्वनि कहलाती है।

#02. अवश्रव्य ध्वनि तरंगें (Infrasonic Waves): 20 Hz से नीचे की ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य तरंग कहते हैं। मनुष्य इसे सुन नहीं सकता है। हाथी इन तरंगों को सुन सकता है।

#03. पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves): 20,000 Hz से ऊँची आवृत्ति वाली तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं। कुत्ता एवं चमगादड़ इन तरंगों को सुन सकते हैं।




पराश्रव्य तरंगों का उपयोग (Use of ultrasonic waves)


  • शरीर में ट्यूमर का पता लगाने में तथा गठिया रोग का उपचार करने में।
  • दूध के अन्दर हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में।
  • वायुयानों, घड़ी के पुर्जी की सफाई में।
  • धातुओं को जोड़ने में।
  • SONAR (Sound Navigation and Ranging) इसका उपयोग समुद्र की गहराई मापने में किया जाता है।


ध्वनि तरंगे: श्रव्य, अवश्रव्य, पराश्रव्य तरंगें

ध्वनि तरंगे: श्रव्य, अवश्रव्य, पराश्रव्य तरंगें


ध्वनि की चाल पर दाब
, ताप आर्द्रता और वायु का प्रभाव


1. दाब का प्रभाव (Effect of Pressure): यदि गैस का तापमान अचर रहे तो ध्वनि की चाल पर दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

2. ताप का प्रभाव (Effect og Temprature): जब वायु का ताप 1 ° C बढ़ता है तो ध्वनि की चाल 0.61 मी./ से. से बढ़ता है।

3. आर्द्रता का प्रभाव (Effect of Humadity): आर्द्र हवा में ध्वनि की चाल, शुष्क हवा में उसकी चाल से अधिक होती है।

4. हवा की गति का प्रभाव (Effect of Air): यदि हवा ध्वनि की दिशा में चल रही है तो ध्वनि तरंगें तेजी से आगे बढ़ती है और ध्वनि की चाल बढ़ जाती है।

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल (मी/ से)

  • शुष्क वायु - 332
  • भाप (100 ° C) - 405
  • हाइड्रोजन - 1269
  • कार्बन डाइआक्साइड - 260
  • जल - 1450
  • काँच - 5640
  • एल्यूमीनियम - 6420
  • लोहा - 5100

ध्वनि तरंग के प्रमुख लक्षण (Characteristics of Sound)


तीव्रता (Intensity/Loudness): ध्वनि की तीव्रता, ध्वनि उत्पन्न करने वाली कम्पनशील वस्तु के कम्पन के आयाम पर निर्भर करती है। कम्पन का आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि की तीव्रता उतनी ही अधिक होगी और ध्वनि तेज सुनाई देगी।

तारत्व (Pitch): यह ध्वनि का वह लक्षण है जिसके कारण मोटी तथा सुरीली ध्वनि में अंतर किया जाता है। उच्च तारत्व वाली ध्वनि की ने आवृत्ति अधिक होती है तथा वह सुरीली सुनाई पड़ती है, जबकि निम्न तारत्व वाली ध्वनि की आवृत्ति कम होती है और वह मोटी सुनाई पड़ती है। स्त्रियों की ध्वनि का तारत्व पुरूष की अपेक्षा और मच्छर का तारत्व शेर की अपेक्षा उच्च होता है। ध्वनि के तारत्व का ध्वनि की तीव्रता से कोई संबंध नहीं होता है।

गुणता (Quality): यह ध्वनि का वह लक्षण है, जिसके आधार पर समान प्रबलता एवं समान आवृत्ति की ध्वनियों के बीच अन्तर किया जा सकता है। दो ध्वनियों में अंतर, उनके मूल स्वरक (Tone) व सनादी (Harmonics) में भिन्नता के कारण होता है।

ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound): जब ध्वनि किसी परावर्तक सतह से टकराने के बाद उसी माध्यम में वापस हो जाती है, ऐसी घटना को ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।

प्रतिध्वनि (Echo): प्रति ध्वनि एक परावर्तित ध्वनि है, जिसे स्पष्ट सुना जा सकता है प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता एवं परावर्तक सतह के बीच की न्यूनतम दूरी लगभग 17.2 मीटर होनी चाहिए। कान पर ध्वनि का प्रभाव 1/10 सेकेण्ड तक रहता है।

ध्वनि का अपवर्तन (Refraction of Sound): ध्वनि तरंगें जब एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है तो उनका पथ विचलित होता है जिसे अपवर्तन कहते हैं। अपवर्तन के कारण ही ध्वनि दिन की अपेक्षा रात में अधिक दूर तक सुनाई पड़ती है।

अनुनाद (Resonance): जब किसी वस्तु के कंपनों की स्वाभाविक आवृत्ति किसी चालक बल के कम्पनों की आवृत्ति के बराबर होती है, तो वह वस्तु अधिकतम आयाम से कंपन करती है। इस घटना को अनुनाद कहते हैं अनुनाद के कारण ही 1939 में यू.एस.ए का टैकोमा पुल क्षतिग्रस्त हो गया था।

अनुरणन (Reverbration): किसी हॉल में ध्वनि स्रोत को बन्द कर देने पर भी, ध्वनि एक दम बन्द नहीं होती, बल्कि परावर्तन के कारण में कुछ समय तक सुनाई देती है। ऐसी घटना को अनुरणन कहते हैं। वह समय जिसके दौरान यह ध्वनि बनी रहती है, अनुरणन काल कहलाता है।

यदि किसी हॉल का अनुरणन काल 0.8 सेकेण्ड से अधिक है तो वक्ता का भाषण स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देगा और यदि अनुरणन काल शून्य है तो हॉल गूंजहीन हॉल कहलाता है।

ध्वनि का विवर्तन (Diffraction of Sound): जब ध्वनि तरंगें अपने मार्ग में किसी बाधा के किनारे पर मुड़ती हैं तो इस घटना को विवर्तन कहते हैं। इसके कारण कमरे के बाहर से आने वाली ध्वनि मुड़कर हम तक पहुँचती है।

ध्वनि का व्यतिकरण (Interference of Sound): जब दो समान आवृत्ति व आयाम की दो ध्वनि तरंगें, एक साथ किसी बिन्दु पर पहुँचती हैं, तो उस बिन्दु पर ध्वनि ऊर्जा का पुनर्वितरण होता है। इसे ध्वनि का व्यतिकरण कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं

i. संपोषी व्यतिकरण (Constructive interference): जब दोनों ध्वनि तरंगें समान कला (Phase) में मिलती है तो उसे संपोषी व्यतिकरण कहते हैं। इसमें ध्वनि की तीव्रता अधिकतम होती है।

ii. विनाशी व्यतिकरण: जब दोनों ध्वनि तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं तो उन्हें विनाशी व्यतिकरण कहते हैं, जिससे ध्वनि की तीव्रता न्यूनतम हो जाती है।

डॉप्लर प्रभाव (Doppler's Effect): डॉप्लर प्रभाव को जान डॉप्लर ने 1842 में प्रतिपदित किया था। डॉप्लर के अनुसार जब किसी ध्वनि स्रोत व श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति उसकी वास्तविक आवृत्ति से अलग सुनाई देती है। इसे डॉप्लर प्रभाव कहा जाता है।

मैक संख्या (Mach Number): किसी माध्यम में पिण्ड की चाल तथा उसी माध्यम में ध्वनि की चाल के अनुपात को मैक संख्या कहते हैं।

मैक संख्या = (किसी माध्यम में पिण्ड की चाल) / (उसी माध्यम में ध्वनि की चाल)

यदि मैक संख्या 1 से अधिक है तो वैसे पिण्ड को पराध्वनिक कहते हैं और यदि 5 से अधिक है तो उसे अतिपराध्वनिक कहते हैं।

ध्वनि बूम (Sound Boom): पराध्वनि (ध्वनि की गति से तेज गति) वायु एक ध्वनि शंकु उत्पन्न करती हैजिसे प्रघाती तरंग कहते हैं। जब यह प्रघाती तरंग श्रोता तक पहुंचती है तो वह अचानक एक प्रकार का जोरदार धमाका सुनता है, जिसे ध्वनि बूम कहते हैं।